जैसे जैसे रात होती है, वो मेरे कंधे पर बैठ जाती थी, कहते है भूतो में वजन होता है, लेकिन मुझे तो अच्छा लगता है , हम पूरी रात बाते करते, उसकी आवाज़ मेरी जैसी ही है, जैसे मै बिना लिपस्टिक लगाए लगती हूँ , same वैसी ही है वो भी, लेकिन उसके हाथ सुंदर है, और वो कम बोलती है " पर हम बाते करते है, रोते है, और सुबह होने पर चुप हो जाते है, उसको पसंद नहीं है, किसी से मिलना, वो मुझे सब की बात बताती है, मुझे अच्छी लगती है अब वो, जैसे मुझे किसी का डर नहीं, उसने कहा नहीं अभी तक कुछ करने का, लेकिन बस वो नाराज़ होती है, जैसे कोई चेहरा बनाता वो वैसे, अच्छी दोस्त है वो मेरी, उसने बोला है वो मुझे एक दिन अपने साथ ले कर जाएगी!
कला का मंदिर "इस बार शिव मंदिर के बगीचे में नई किस्म के फूल खिले हैं, आज मैं वही तोड़ कर लायी !" कहते हुए कला ने अपनी छोटी पूजा की टोकरी को बरामदे की टेबल पर रखा | "माली इस बार नया होगा, वरना पुराने माली को तो सुस्ताने से ही फुरसत ना थी" याद है एक बार जब अतुल आम तोड़ कर लाया था|और उसे भनक तक ना हुई|" , कहते हुए मास्टर जी मुस्कुराने लगे ! वैसे तो गोपाल जी अब एक रिटायर्ड मास्टर है , लेकिन अब यही उनकी पहचान है, गांव के सभी लोग और उनकी पत्नी कुशला भी उनको यही कह कर पुकारती है! एक बेटी और एक बेटे का छोटा सा परिवार है ! बेटी अब विवाहित है ,और बेटा बाहर शहर में रहता है! क्या अतुल का फ़ोन आया था? कला ने तुरंत ही पूछा ! हाँ कल देर रात बात हुई! कहता है कुछ दिन में घर आऊंगा , कोई जरूरी बात करनी है ! क्या तुम्हे कुछ पता है? कुशला थोड़ी मुस्कुराते हुए बोली "हाँ, मुलुम तो है , लेकिन आप उसके आने पर उसी से बात करे , तो ज़्यादा बेहतर होगा!" क्या कोई लड़की पसंद है उसे? मास्टर जी ने कला के मुस्कुराते चेहरे को घूर कर कहा! आप पहले ही समझ गए! आप उसे कुछ मत कहना, उसकी जिंदगी ...