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रात

  जैसे जैसे रात होती है, वो मेरे कंधे पर बैठ जाती थी, कहते है भूतो में वजन  होता है, लेकिन मुझे तो अच्छा लगता है , हम पूरी रात बाते करते, उसकी आवाज़ मेरी जैसी ही है, जैसे मै बिना लिपस्टिक लगाए लगती हूँ , same  वैसी ही है वो भी, लेकिन उसके हाथ सुंदर है, और वो कम बोलती है  " पर हम बाते करते है, रोते है, और सुबह होने पर चुप हो जाते है, उसको पसंद नहीं है, किसी से मिलना, वो मुझे सब की बात बताती है,   मुझे अच्छी  लगती है अब वो, जैसे मुझे किसी का डर नहीं,  उसने कहा नहीं अभी तक कुछ करने का, लेकिन बस वो नाराज़ होती है, जैसे कोई चेहरा बनाता वो वैसे, अच्छी दोस्त है वो मेरी, उसने बोला है वो मुझे एक दिन अपने साथ ले कर जाएगी!  

A sold soul reader's choice award.

a sold soul my debut is nominated for TCK reader’s choice award in general fiction . I want your lots of vote
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||श्री हनुमान चालीसा || हनुमान चालीसा हनुमान चालीसा एक प्रमुख हिंदू भक्तिपूर्ण कविता है जो तुलसीदास द्वारा संग्रहित है और इसे भगवान हनुमान को समर्पित किया गया है। यह कविता 40 पंक्तियों से मिलकर बनी है, जिन्हें "चौपाई" और "दोहा" कहा जाता है, और इसे आध्यात्मिक विकास, स्वास्थ्य, और संपत्ति के लिए व्यापकता से पढ़ा जाता है। ह नुमान चालीसा क े पाठ से माना ज ाता है कि यह प ्रतिरक्षा की क ोषिका पैदा कर स कता है, जो व्यक्ति क ो नकारात्मक ऊ र्जाओं से सुरक्षित र खती है ||श्री हनुमान चालीसा || ॥ दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥ ॥ चौपाई ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥४ हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥ शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जगवं...

A sold soul

a sold soul A sold soul is debut novel of mine , that came soon ,i was working on that from one year,  I choose writing because it's my  dream to saw my name somewhere that introducing my passion , the books that i read from my favorite authors always took me into the other world ,where i can learn i can grow i can run my mind until the end of the story . and that's how its all started . yes   " A sold soul " is a dedication to my father "Rajendra panwar " who is such a wonder-full person and supportive for me ,who gave the enough strength to me for choosing life with wings in open sky. the cover of my book is launched , i hope you like it , and if you have any question and suggestion then you came ask   https://goo.gl/forms/aWNKJDRaENrM8hK12      just click on this link , i would love to answer you. I will gave all the answers of " A sold soul " in my next article .Thank-you  so much for all.  

रात

  जैसे जैसे रात होती है, वो मेरे कंधे पर बैठ जाती थी, कहते है भूतो में वजन  होता है, लेकिन मुझे तो अच्छा लगता है , हम पूरी रात बाते करते, उसकी आवाज़ मेरी जैसी ही है, जैसे मै बिना लिपस्टिक लगाए लगती हूँ , same  वैसी ही है वो भी, लेकिन उसके हाथ सुंदर है, और वो कम बोलती है  " पर हम बाते करते है, रोते है, और सुबह होने पर चुप हो जाते है, उसको पसंद नहीं है, किसी से मिलना, वो मुझे सब की बात बताती है,   मुझे अच्छी  लगती है अब वो, जैसे मुझे किसी का डर नहीं,  उसने कहा नहीं अभी तक कुछ करने का, लेकिन बस वो नाराज़ होती है, जैसे कोई चेहरा बनाता वो वैसे, अच्छी दोस्त है वो मेरी, उसने बोला है वो मुझे एक दिन अपने साथ ले कर जाएगी!