योगासन या योगा अपने आप में एक सपूर्ण शब्द है ! जिसका अर्थ होता है "शरीर , मन और आत्मा का सुचारु रूप से काम करना ! योगा में हम इन्ही सब बातो को सीखते है !
परन्तु योगा की शुआत किस प्रकार की जाये ? कौनसा समय सबसे ज़्यादा फायदेमंद रहेगा? और अपने दैनिक जीवन में इसे किस प्रकार अपनाये की हम योगा से जुड़ पाए और इसके फायदे प्राप्त कर सके !
इस ब्लॉग हम इस बारे में ही बात करेंगे !
अपने मन व मस्तिष्क को मजबूत करे !
किसी भी काम की शुरुआत के लिए हमें अपने मन को , उस बात के लिए मजबूत करना ज़रूरी है ! क्युकी योगा एक ऐसी प्रक्रिया है ! जिसका निरंतर अभ्यास करने से ही आप बेहतर परिणाम देख पाएंगे !
अपने मन और दिमाग को बार बार ये याद दिलाये की योगा आपके लिए कितना ज़रूरी है ! और इसके अच्छे परिणाम से आप कितना स्वस्थ महसूस करेंगे !
योगा के लिए सबसे बेहतर सूर्य उदय होने के पूर्व का समय माना जाता है ! शास्त्र तथा आयुर्वेद भी इस बात की पूर्ण पुष्टि करते है की , सुबह के वातावरण में ऊर्जा और सकारत्मकता के सम्पूर्ण स्रोत हमारे शरीर को मिलते है !
हालंकि वर्तमान समय में समय की कमी के चलते " इवनिंग योगा " का भी चलन हो गया है ! जो की गलत नहीं है ! लेकिन सुबह का समय सदैव बेहतर परिणाम देता है ! कोशिश करें की अपने व्यस्त ओफिस शेड्यूल में से अपने बेहतर स्वस्थ के लिए , आप सुबह का समय दे पाए !
अगर फिर भी आपकी व्यस्तता ज़्यादा है तो , अपने खाली समय के अनुसार योगा के लिए पर्याप्त समय चुने ! परन्तु वो समय ऐसा हो जिसमें आप अपने मन और मतिष्क को पूरी तरह से योगा में लगा सके ! कोई और अशांति आपके मन में न हो !
योगा के लिए बेहतर जगह का चुनाव
योगा के लिए सदैव ऐसी जगह चुने जंहा सूर्य की सीधी रौशनी आती हो ! आस -पास प्राकृतिक वातावरण हो ! अगर इसके लिए कोई गार्डन या छत हो तो सबसे बेहतर होगा ! वरना आप अपने कमरे में भी ऐसा वातावरण कुछ चीज़ो की सहायता से बना सकते है !
ऑनलाइन योगा क्लास
वर्तमान समय में ये एक कारगर उपाय है ! जो आपकी योगा के शुरुआती चरणों में मददगार साबित होगा ! कई अच्छे और ट्रेंड योगा टीचर ऑनलाइन क्लासेस के ज़रिये आपको योगा सीखा देते है !
सूर्यनमस्कार से करें शुरुआत
प्रणामासन
योगा मैट के ऊपर खड़े हो जाएं ! और सम्भव हो तो सूर्य के सामने सीधे खड़े हो जाये । दोनों हाथों को जोड़ कर सीने से सटा लें ! और गहरी, लंबी सांस लेते हुए , आराम की अवस्था में सीधे खड़े हो जाएं। धीमे गति से स्वास लें !
हस्तउत्तनासन
पहली अवस्था में खड़े रहते हुए सांस लें और हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। और पीछे की ओर थोड़ा झुकें। ध्यान रहे कि दोनों हाथ कानों से सटे हुए हों। हाथों को पीछे ले जाते हुए , शरीर को भी पीछे की ओर मोड़े।
पादहस्तासन
सूर्य नमस्कार की यह खासियत है कि , इसके सारे चरण एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। हस्तोतानासन की मुद्रा से सीधे पादहस्तासन की मुद्रा में आना होता है। इसके लिए हाथों को ऊपर उठाए हुए , आगे की ओर झुकने की कोशिश करें। ध्यान रहें कि इस दौरान सांसों को धीरे-धीरे छोड़ना होता है। कमर से नीचे की ओर झुकते हुए हाथों को पैरों के बगल में ले आएं। ध्यान रहे कि इस अवस्था में आने पर पैरों के घुटने मुड़े हुए न हों।
अश्व संचालनासन
हस्त पादासन से सीधे उठते हुए सांस लें ! और बांए पैर को पीछे की ओर ले जाएं ! और दांये पैर को घुटने से मोड़ते हुए छाती के दाहिने हिस्से से सटाएं। हाथों को जमीन पर पूरे पंजों को फैलाकर रखें। ऊपर की ओर देखते हुए गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं।
दंडासन
गहरी सांस ले और दांये पैर को भी पीछे की ओर ले जाएं ! शरीर को एक सीध में करें और हाथों पर जोर देकर कुछ इसी अवस्था में रहें।
अष्टांग नमस्कार
अब धीरे-धीरे गहरी सांस लेते हुए घुटनों को जमीन से छुए और धीरे धीरे सांस छोड़ें। पूरे शरीर पर ठोड़ी, छाती, हाथ, पैर को जमीन पर छुएं और अपने कूल्हे के हिस्से को थोड़ा ऊपर की ओर उठाएं।
भुजंगासन
कोहनी को कमर से सटाते हुए हाथों के पंजे के बल से , छाती को ऊपर की ओर उठाएं।
गर्दन को ऊपर की ओर उठाते हुए पीछे की ओर ले जाएं।
अधोमुख शवासन
भुजंगासन से सीधे इस अवस्था में आएं। अधोमुख शवासन में कूल्हे को ऊपर की ओर उठाया जाता है ! लेकिन पैरों की एड़ी जमीन पर टिका कर रखें। शरीर को अपने V के आकार में बनाएं।
अश्व संचालासन
अब एक बार फिर से अश्व संचालासन की मुद्रा में आ जाये ! लेकिन ध्यान रहें की अबकी बार बांये पैर को आगे की ओर रखें।
पादहस्तासन
अश्न संचालनासन मुद्रा से सामान्य स्थिति में वापस आने के बाद , अब पादहस्तासन की मुद्रा में आएं। इसके लिए हाथों को ऊपर उठाए हुए ही आगे की ओर झुकने की कोशिश करें। ध्यान रहें कि इस दौरान सांसों को धीरे-धीरे छोड़ना होता है। कमर से नीचे की ओर झुकते हुए हाथों को पैरों के बगल में ले आएं। ध्यान रहे कि इस अवस्था में आने पर पैरों के घुटने मुड़े हुए न हों।
हस्तउत्तनासन
पादहस्तासन की मुद्रा से सामान्य स्थिति में वापस आने के बाद हस्तउत्तनासन की मुद्रा में वापस आ जाएं। इसके लिए हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और पीछे की ओर थोड़ा झुकें। हाथों को पीछे ले जाते हुए शरीर को भी पीछे की ओर ले जाएं।
प्रणामासन
हस्तउत्तनासन की मुद्रा से सामान्य स्थिति में वापस आने के बाद सूर्य की तरफ चेहरा कर एक बार फिर से प्रणामासन की मुद्रा में आ जाएं।





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